कॉलेज के बारे में

पंडित जवाहरलाल नेहरू इंटर कॉलेज

तन मन धन से पूर्ण सहयोग यथा शक्ति योगदान से भवन निर्माण का कार्य अबाध रूप से होने लगा। वर्तमान समय में विद्यालय में लगभग 50 कमरों वाला विशाल भवन अपने भव्य रूप में खड़ा है। जिसका विवरण निम्न लिखित है जिसे पूर्व पत्रिका में भी छापा गया था। किन्तु पाठकों के लिए पुनः छापा जा रहा है। विद्यालय के निर्माण में श्री महेश कुमार दीक्षित, रामगोपाल पाल, श्री राजेश चन्द्र, के. डी. राम, प्रकाश गुप्त, गोविन्द नारायण दीक्षित, रमा कान्त तिवारी, बृज लाल वर्मा, व श्री प्रताप नारायण मिश्र ने भवन निर्माण में एक माह का वेतन देकर सहयोग किया था। इस समय विद्यालय के पास 20 x 25 फुट की नाप के 26 शिक्षण कक्ष हैं। जिसमें लगभग 1200 छात्र/छात्रायें सुविधानुसार शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
प्रयोगशालाएं : विद्यालय में 30 x 20 फुट की 4 प्रयोगशालाएं तथा 20 x 35 की एक प्रयोगशाला तथा 41 x 25 फुट की एक प्रयोगशाला है। यह 6 प्रयोगशालाएं लाखें रुपये के वैज्ञानिक उपकरण हैं जिसमें छात्र सुविधा पूर्वक प्रयोग करते हैं।
पुस्तकालय कक्ष : विद्यालय में 20 x 20 फुट नाप का एक स्व. सूर्यपाल सिंह परिहार स्मारक पुस्तकालय एवं वाचनालय हैं जिसमें लाखें रुपये की साहित्यक वैज्ञानिक एवं विषय से संम्बन्धित पुस्तकें उपलब्ध है। जिसका लाभ शिक्षक/छात्र/छात्राएं उठा रहे हैं।
प्रधानाचार्य कक्ष : विद्यालय में एक 16 x 20 फुट की नाप का प्रधानाचार्य कक्ष है। उसके पीछे एक छोटा कक्ष भी है।
कार्यालय कक्ष : प्रधानाचार्य कक्ष से लगा हुआ 18 x 20 फुट का एक कार्यालय कक्ष है जिस पर तीन लिपिक बैठकर समस्त कार्यालयों कार्यपूर्ण करते हैं।
अन्य कक्ष : विद्यालय के पास विभिन्न नाप के 12 कक्ष हैं। जो विद्यालय के भण्डार आदि अन्य कार्यों के लिए प्रयोग किए जाते हैं।
बरामदा उक्त कक्षों के सामने उत्तर से दक्षिण पूर्व से पश्चिम तथा दक्षिण से उत्तर
की ओर फैला एक 10 फुट चौड़ा विशाल बरामदा है। जो भवन की सुन्दरता में चार चाँद लगाता है।
बाउन्ड्री वाल : विद्यालय के चारों ओर लगभग 8 एकड़ क्षेत्रफल से 6 फुट ऊँची चहार दीवाल (बाउन्ड्रीवाल) बनी हुई है। जिससे विद्यालय की पूर्ण सुरक्षा रहती है।
मुख्य द्वार : विद्यालय का मुख्य द्वार बड़ा विशाल अत्यंत ऊँचा अत्याकर्षक हो जो स्वयं ही विद्यालय भवन की विशालता का ध्योतक है। इस समय विद्यालय के पास लगभग 50 लाख रुपयों से निर्मित विशल भवन विद्यामान है और अब भी प्रतिवर्ष आवश्यकतानुसार भवन का निर्माण कार्य होता रहता है। इस समय 20 x 25 फुट के तीन कमरे ऊपर अर्द्ध निर्मित अवस्था में विद्यमान है। जिन्हें पूरा कराने की योजना है। दानदाताओं द्वारा कराया गया निर्माण कार्य : सर्व प्रथम भागवत सिंह परिहार ने एक